इजरायल के हाइफा में भारतीय सैनिकों ने 106 साल पहले लड़ा था युद्ध, तुर्की की सेना को चटाई थी धूल
आज से 106 साल पहले, 23 सितंबर 1918 को इजरायल के हाइफा शहर में भारतीय सैनिकों ने ऐसा पराक्रम दिखाया था, जिसे दुनिया हमेशा याद रखेगी। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान हाइफा की लड़ाई में भारतीय घुड़सवार सैनिकों ने तुर्की की सेना को करारी शिकस्त दी थी। यह दिन भारतीय सेना के लिए गौरवपूर्ण है और हर साल 23 सितंबर को ‘हाइफा दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। आइए जानते हैं इस ऐतिहासिक युद्ध की कहानी।
हाइफा की लड़ाई का महत्व:
प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश और मित्र राष्ट्रों की सेनाएं तुर्की और उसके सहयोगियों से लड़ रही थीं। इस संघर्ष का एक महत्वपूर्ण मोर्चा था हाइफा, जो आज के इजरायल में स्थित है। हाइफा बंदरगाह, भूमध्य सागर पर स्थित एक महत्वपूर्ण सैन्य और रणनीतिक ठिकाना था। तुर्की की सेना ने इस इलाके पर कब्जा कर लिया था, जिसे मित्र राष्ट्रों की सेनाओं के लिए छुड़ाना जरूरी था।
भारतीय सैनिकों का अद्वितीय पराक्रम:
भारतीय सेना की 15वीं इम्पीरियल सर्विस कैवेलरी ब्रिगेड को इस कठिन मिशन की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस ब्रिगेड में जोधपुर लांसर्स, मैसूर लांसर्स और हैदराबाद लांसर्स जैसे वीर सैनिक शामिल थे।
भारतीय घुड़सवार सैनिकों ने बिना तोपखाने के समर्थन के केवल भालों और तलवारों के साथ दुश्मन के मजबूत ठिकानों पर हमला किया। तुर्की और जर्मन सेना की कड़ी प्रतिरोधक रणनीति के बावजूद भारतीय सैनिकों ने हिम्मत नहीं हारी और तुर्की सेना को पराजित कर हाइफा को मुक्त कराया।
हाइफा की जीत का असर:
हाइफा की इस जीत ने मित्र राष्ट्रों के लिए महत्वपूर्ण रणनीतिक उपलब्धि हासिल की और इसके बाद तुर्की सेना को पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा। इस जीत ने भारतीय सैनिकों की बहादुरी और पराक्रम को पूरे विश्व में प्रसिद्ध कर दिया।
वीरों को सम्मान:
इस युद्ध में जोधपुर लांसर्स के मेजर ठाकुर दलपत सिंह शेखावत ने अदम्य साहस दिखाया और उन्हें ‘हाइफा हीरो’ कहा गया। उन्हें मरणोपरांत ‘मिलिट्री क्रॉस’ से सम्मानित किया गया। इसके अलावा, कई अन्य भारतीय सैनिकों को भी इस युद्ध में बहादुरी के लिए सम्मानित किया गया।
आज भी मनाया जाता है हाइफा दिवस:
हाइफा की इस ऐतिहासिक जीत को याद करते हुए हर साल 23 सितंबर को भारत में ‘हाइफा दिवस’ मनाया जाता है। इस दिन भारतीय सेना उन शहीदों को श्रद्धांजलि देती है जिन्होंने हाइफा की लड़ाई में अपने प्राणों की आहुति दी। इजरायल में भी हाइफा में एक युद्ध स्मारक है, जहां भारतीय सैनिकों की वीरता को सम्मानित किया जाता है।
