बांग्लादेश, कारगिल… रूस पर इतना भरोसा क्यों करता है भारत? मोदी-पुतिन दोस्ती की कहानी चार पॉइंट्स में
भारत और रूस के बीच की दोस्ती एक गहरे ऐतिहासिक, राजनीतिक और सामरिक संबंधों पर आधारित है। इस दोस्ती का सफर कई महत्वपूर्ण घटनाओं और सहयोगों से भरा है, जिसने दोनों देशों के बीच मजबूत संबंध स्थापित किए हैं। यहाँ मोदी और पुतिन की दोस्ती की कहानी को चार महत्वपूर्ण बिंदुओं में समझाया गया है:
भारत और रूस का संबंध 1960 के दशक से मजबूत हुआ, जब रूस ने भारत को रक्षा उपकरणों और तकनीक में मदद की। कारगिल युद्ध के दौरान, भारत को रूस से मिलने वाले सैन्य समर्थन ने भारतीय सेना को महत्वपूर्ण बढ़त दिलाई।
1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के समय, रूस ने भारत का खुलकर समर्थन किया, जिससे भारत को क्षेत्रीय सुरक्षा में मदद मिली और एक नई मित्रता की शुरुआत हुई।
भारत रूस से अत्याधुनिक रक्षा उपकरण, जैसे कि सुखोई फाइटर जेट, टी-90 टैंक्स, और अन्य सैन्य तकनीक खरीदता है। यह सहयोग भारत की सामरिक सुरक्षा को मजबूत करता है।
दोनों देशों के बीच नियमित रूप से संयुक्त सैन्य अभ्यास होते हैं, जो एक-दूसरे की सैन्य क्षमताओं को समझने और साझा करने में मदद करते हैं।
भारत और रूस ने वैश्विक मंच पर कई बार एक-दूसरे का समर्थन किया है, जैसे कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में। भारत की विदेश नीति में रूस एक महत्वपूर्ण सहयोगी है, जो भारत के हितों के लिए आवश्यक समर्थन प्रदान करता है।
ब्रिक्स, शंघाई सहयोग संगठन (SCO) जैसे विभिन्न बहुपक्षीय संगठनों में भारत और रूस का सहयोग एक महत्वपूर्ण आधार है, जो दोनों देशों के बीच रिश्ते को और भी मजबूत करता है।
मोदी-पुतिन की मित्रता: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच व्यक्तिगत संबंध भी भारत-रूस संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दोनों नेता एक-दूसरे के साथ नियमित रूप से मुलाकात करते हैं और वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श करते हैं।
विश्वसनीयता और विश्वास: मोदी और पुतिन के बीच की मित्रता ने दोनों देशों के नेताओं के बीच विश्वास और भरोसे का वातावरण बनाया है, जिससे आपसी सहयोग में वृद्धि हुई है।
