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भारत से तकरार, चीन संग यारी… अनुरा कुमारा दिसानायके का श्रीलंकाई राष्ट्रपति बनना दिल्ली के लिए कितनी बड़ी चिंता?

श्रीलंका के आगामी राष्ट्रपति चुनाव में अनुरा कुमारा दिसानायके का नाम तेजी से उभर रहा है, और अगर वह राष्ट्रपति बनते हैं, तो यह भारत के लिए बड़ी चिंता का विषय हो सकता है। दिसानायके, जो जनता विमुक्ति पेरामुना (JVP) के प्रमुख हैं, ने अपनी राजनीतिक विचारधारा और कार्यों से श्रीलंका की राजनीति में नए आयाम जोड़े हैं। उनका झुकाव चीन की ओर रहा है, जबकि उन्होंने भारत के साथ कुछ मामलों में टकराव का रुख भी अपनाया है।

कौन हैं अनुरा कुमारा दिसानायके?

अनुरा कुमारा दिसानायके श्रीलंका के एक प्रमुख वामपंथी नेता हैं और JVP पार्टी के नेतृत्व में कई जन आंदोलनों का हिस्सा रहे हैं। उनकी पार्टी ऐतिहासिक रूप से समाजवादी विचारधारा की रही है, और उन्होंने आर्थिक नीतियों से लेकर अंतरराष्ट्रीय संबंधों तक, कई मुद्दों पर अपनी स्वतंत्र सोच को स्थापित किया है। दिसानायके की राजनीति का मुख्य आधार श्रीलंका में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन और मजदूरों के अधिकारों की सुरक्षा रही है।

भारत-श्रीलंका संबंधों पर असर:

यदि दिसानायके राष्ट्रपति बनते हैं, तो भारत-श्रीलंका संबंधों में तनाव की संभावना हो सकती है। वह भारत के साथ आर्थिक और सैन्य संबंधों को लेकर पहले भी आलोचनात्मक रहे हैं, और कई बार उन्होंने भारत की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। हाल के वर्षों में, भारत ने श्रीलंका को कर्ज संकट से बाहर निकालने में मदद की थी, लेकिन दिसानायके की नेतृत्व वाली सरकार इस कर्ज और आर्थिक मदद के संदर्भ में नए समीकरणों की ओर जा सकती है।

चीन के साथ बढ़ती नजदीकियां:

दिसानायके का झुकाव चीन की ओर देखा गया है, और यदि वह राष्ट्रपति बनते हैं, तो श्रीलंका में चीन के प्रभाव में और वृद्धि हो सकती है। यह भारत के लिए एक रणनीतिक चुनौती होगी, क्योंकि भारत पहले से ही चीन की ‘बेल्ट एंड रोड’ परियोजना के कारण श्रीलंका में उसकी उपस्थिति को लेकर चिंतित है। हंबनटोटा बंदरगाह, जिसे चीन ने लीज पर लिया है, पहले से ही भारत की सुरक्षा चिंताओं का हिस्सा बना हुआ है।

भारत के लिए कूटनीतिक चुनौती:

भारत के लिए दिसानायके का राष्ट्रपति बनना एक कूटनीतिक चुनौती साबित हो सकता है। दक्षिण एशिया में भारत हमेशा से क्षेत्रीय स्थिरता और अपने पड़ोसियों के साथ मजबूत संबंधों पर ध्यान देता रहा है। यदि श्रीलंका चीन की ओर और अधिक झुकाव दिखाता है, तो यह भारत की सुरक्षा और क्षेत्रीय प्रभाव के लिए चिंता का कारण बनेगा। इसके अलावा, तमिल मुद्दे और भारतीय मछुआरों के मामले पर भी श्रीलंका के रुख में बदलाव आ सकता है।

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