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जेलेंस्की बोले- रूस को जंग रोकने के लिए मजबूर करना होगा: UNSC में कहा- सिर्फ बातचीत से नहीं निकलेगा हल, पुतिन खुद पीछे नहीं हटेंगे

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के मंच से रूस के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए बयान दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि रूस को इस युद्ध को रोकने के लिए मजबूर करना होगा, क्योंकि केवल बातचीत के माध्यम से समाधान नहीं निकलेगा। जेलेंस्की का यह बयान उस समय आया है, जब यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध ने गंभीर रूप ले लिया है और इसका अंत जल्द होता नजर नहीं आ रहा।

UNSC में जेलेंस्की का बयान:

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बोलते हुए जेलेंस्की ने कहा, “रूस केवल बातचीत से पीछे नहीं हटेगा। पुतिन खुद इस युद्ध को रोकने की कोई मंशा नहीं रखते। हमें उन्हें युद्ध रोकने के लिए मजबूर करना होगा।” उन्होंने कहा कि जब तक अंतर्राष्ट्रीय समुदाय एकजुट होकर रूस पर दबाव नहीं डालेगा, तब तक यह संघर्ष चलता रहेगा।

युद्ध का हल सिर्फ बातचीत से संभव नहीं:

जेलेंस्की ने यह भी कहा कि रूस के साथ केवल कूटनीतिक वार्ता करना पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि रूस की आक्रामकता को रोकने के लिए वैश्विक समुदाय को अधिक ठोस और सख्त कदम उठाने होंगे। उनका मानना है कि यदि पुतिन को खुली छूट दी जाती है, तो यह युद्ध केवल यूक्रेन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह अन्य देशों को भी प्रभावित कर सकता है।

रूस की आक्रामकता पर जेलेंस्की का कड़ा रुख:

रूस द्वारा यूक्रेन पर किए जा रहे आक्रमण को लेकर जेलेंस्की ने एक बार फिर विश्व नेताओं से समर्थन की अपील की। उन्होंने कहा, “रूस की आक्रामकता को रोकने के लिए एक मजबूत और एकजुट अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया की जरूरत है। रूस को हर तरीके से दबाव में लाना होगा, ताकि वह अपने विस्तारवादी इरादों से पीछे हटे।”

वैश्विक समर्थन की अपील:

यूक्रेन के राष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक संगठनों से भी अपील की कि वे रूस पर और अधिक आर्थिक, राजनीतिक और सैन्य प्रतिबंध लगाएं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक रूस पर सख्त प्रतिबंध नहीं लगाए जाएंगे और उसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग नहीं किया जाएगा, तब तक वह अपनी आक्रामक नीतियों को नहीं बदलेगा।

पुतिन पर दबाव डालने की जरूरत:

जेलेंस्की ने स्पष्ट कहा कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को स्वयं युद्ध रोकने के लिए प्रेरित करना असंभव है। उन्होंने कहा, “पुतिन केवल ताकत की भाषा समझते हैं। अगर हम चाहते हैं कि यह युद्ध खत्म हो, तो हमें अपनी सैन्य और आर्थिक ताकत का उपयोग करना होगा और उन्हें मजबूर करना होगा।”

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