ट्रंप और कमला हैरिस को मिले बराबर वोट: अमेरिका में 224 साल पहले पैदा हुई थी ऐसी स्थिति, कैसे होगा नए राष्ट्रपति पर फैसला?
अमेरिका में 2024 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान यदि डोनाल्ड ट्रंप और कमला हैरिस को बराबर वोट मिलते हैं, तो यह एक संवैधानिक संकट पैदा कर सकता है। इस स्थिति का सामना करने के लिए अमेरिका में पहले से निर्धारित प्रक्रिया है, लेकिन यह जटिल और विवादास्पद हो सकती है।
मतदान प्रक्रिया और इलेक्टोरल कॉलेज
अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव इलेक्टोरल कॉलेज के माध्यम से होता है, जिसमें प्रत्येक राज्य को उसकी जनसंख्या के आधार पर एक निश्चित संख्या में वोट मिलते हैं। कुल 538 इलेक्टोरल वोट हैं, और किसी भी उम्मीदवार को जीतने के लिए 270 वोट की आवश्यकता होती है। यदि चुनाव के परिणाम में किसी कारणवश दोनों उम्मीदवारों को बराबर वोट मिलते हैं, तो स्थिति काफी जटिल हो जाती है।
संवैधानिक उपाय
ऐसी स्थिति में, अमेरिका के संविधान के अनुच्छेद 12 के अनुसार, अगर इलेक्टोरल कॉलेज में कोई उम्मीदवार जीतने के लिए आवश्यक संख्या में वोट नहीं प्राप्त करता है, तो प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) नए राष्ट्रपति का चुनाव करती है।
- प्रतिनिधि सभा का चुनाव: प्रत्येक राज्य को एक वोट मिलता है, और जो उम्मीदवार पहले 26 वोट प्राप्त करता है, वह राष्ट्रपति बन जाता है।
- सीनेट का चुनाव: यदि उप-राष्ट्रपति के लिए वोटिंग भी बराबरी पर आती है, तो सीनेट नए उप-राष्ट्रपति का चुनाव करेगी।
ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
224 साल पहले, 1800 के राष्ट्रपति चुनाव में भी ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई थी। उस समय थॉमस जेफरसन और एरोन बर्जर के बीच वोटों की समानता देखी गई थी, जिसके बाद प्रतिनिधि सभा को चुनाव करना पड़ा। इस घटना ने अमेरिका की चुनावी प्रक्रिया में सुधार लाने की आवश्यकता को उजागर किया और अंततः 12वें संशोधन को जन्म दिया, जो आज भी लागू है।
संभावित विवाद
यदि ट्रंप और कमला हैरिस के बीच वोटों की समानता की स्थिति उत्पन्न होती है, तो यह केवल चुनावी प्रक्रिया में नहीं, बल्कि देश की राजनीति में भी भारी विवाद पैदा कर सकती है। राजनीतिक दल और उनके समर्थक इस स्थिति को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन कर सकते हैं, जिससे देश में अस्थिरता बढ़ सकती है।
