डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम: छात्रों के प्रेरणास्त्रोत, 15 अक्टूबर को मनाया जाएगा ‘विश्व छात्र दिवस’
भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, जिन्हें “जनता के राष्ट्रपति” के नाम से भी जाना जाता है, ने अपने जीवन को देश और विश्वभर के छात्रों को सशक्त करने के लिए समर्पित किया। उनकी जयंती 15 अक्टूबर को ‘विश्व छात्र दिवस’ के रूप में मनाई जाती है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉ. कलाम को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके विचारों और शिक्षाओं का महत्व बताया।
डॉ. कलाम का योगदान
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का जीवन छात्रों के लिए एक प्रेरणा है। उन्होंने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण योगदान दिए, विशेषकर भारतीय अंतरिक्ष और मिसाइल विकास कार्यक्रम में। उन्हें ‘मिसाइल मैन’ के नाम से भी जाना जाता है। उनकी सोच और दृष्टि ने न केवल भारतीय छात्रों को बल्कि दुनिया भर के युवाओं को प्रेरित किया है।
विश्व छात्र दिवस का महत्व
‘विश्व छात्र दिवस’ का उद्देश्य छात्रों के विकास, शिक्षा और सामाजिक विकास पर ध्यान केंद्रित करना है। इस दिन विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिसमें डॉ. कलाम की शिक्षाओं को उजागर किया जाता है और युवाओं को अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया जाता है। पीएम मोदी ने छात्रों से अपील की कि वे अपने जीवन में अनुशासन और समर्पण को अपनाएं, जैसा कि डॉ. कलाम ने अपने जीवन में किया।
पीएम मोदी का संदेश
पीएम मोदी ने डॉ. कलाम के योगदान को याद करते हुए कहा, “डॉ. कलाम का जीवन हमें यह सिखाता है कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होती। यह हमारे विचारों, दृष्टिकोण और लक्ष्यों को आकार देती है। आज का दिन हमारे सभी युवाओं को यह याद दिलाने का अवसर है कि वे अपने सपनों को साकार करने के लिए कड़ी मेहनत करें।”
डॉ. कलाम की शिक्षा
डॉ. कलाम हमेशा छात्रों को यह समझाते थे कि असफलता से निराश नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर आप अपने लक्ष्य में असफल होते हैं, तो इसे सीखने का अवसर समझें। इससे आपको अपने लक्ष्य को प्राप्त करने की ओर एक नया रास्ता मिल सकता है।” उनकी शिक्षा ने लाखों छात्रों को सकारात्मक सोचने और अपने लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहने की प्रेरणा दी है।
