नेतन्याहू ने रक्षा मंत्री योव गैलंट को बर्खास्त किया: कहा- हमारे बीच भरोसा खत्म हो गया था; जंग में दुश्मन इसका फायदा उठा रहे
इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने रक्षा मंत्री योव गैलंट को पद से हटा दिया है। नेतन्याहू ने गैलंट को बर्खास्त करते हुए कहा कि उनके बीच अब विश्वास नहीं बचा था और जंग के इस मुश्किल समय में दुश्मन इसका फायदा उठा सकते थे। गैलंट की बर्खास्तगी को लेकर सियासी हलकों में विवाद उत्पन्न हो गया है, क्योंकि यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब इसराइल और हिज़्बुल्लाह के बीच तनाव चरम पर है।
1. ब्रेकडाउन ऑफ ट्रस्ट
नेतन्याहू ने गैलंट को बर्खास्त करते हुए कहा, “हमारे बीच भरोसा खत्म हो गया था। यह इस वक्त की जंग के लिए खतरनाक हो सकता था। हमारे सैनिकों की सुरक्षा के लिए यह आवश्यक था कि निर्णय लिया जाता।” रक्षा मंत्री गैलंट ने सरकार की न्यायिक सुधार योजना के खिलाफ आलोचनाएं की थीं और इसके विरोध में सार्वजनिक रूप से बयान दिए थे। गैलंट का कहना था कि यह योजना इसराइल के लोकतंत्र को कमजोर कर सकती है, और उनकी आलोचना के कारण नेतन्याहू के साथ उनके संबंधों में खटास आ गई थी।
2. न्यायिक सुधार पर विवाद
गैलंट ने जनवरी में इस न्यायिक सुधार योजना का विरोध करते हुए कहा था कि इसके कारण इसराइल की न्यायपालिका पर सरकार का अत्यधिक नियंत्रण बढ़ेगा, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरे की घंटी हो सकती है। गैलंट का यह कदम उस समय आया जब इसराइल में सरकार के खिलाफ भारी विरोध प्रदर्शन हो रहे थे। ऐसे में यह सवाल उठने लगा था कि क्या गैलंट का बयान इसराइल की सरकार की सख्त नीति को कमजोर करेगा, विशेष रूप से जब देश युद्ध के हालात में है।
3. दुश्मन के खिलाफ प्रभाव
गैलंट की बर्खास्तगी के बाद, नेतन्याहू ने यह भी कहा कि इस समय इसराइल के सामने मौजूद सुरक्षा खतरे और जंग की स्थिति में दुश्मन इस अवसर का फायदा उठा सकते हैं। उनका इशारा गाजा और हिज़्बुल्लाह जैसे आंतरिक और बाहरी शत्रुओं की ओर था। नेतन्याहू का कहना था कि जंग के इस समय में देश के भीतर से कमजोर संकेत नहीं जाने चाहिए, क्योंकि दुश्मन इस पर अपनी रणनीतियाँ तैयार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गैलंट के साथ का सहयोग अब उस स्तर पर नहीं था, जो इस संकट में आवश्यक था।
4. राजनीतिक परिणाम
इस फैसले से इसराइल के राजनीतिक माहौल में और तनाव बढ़ सकता है। गैलंट के समर्थकों का कहना है कि उनका निर्णय सही था, क्योंकि उन्होंने इसराइल के लोकतंत्र और सुरक्षा हितों को प्राथमिकता दी। वहीं, नेतन्याहू के समर्थकों का कहना है कि यह कदम देश की सुरक्षा के हित में था और इसे एक मजबूत निर्णय के रूप में देखा जाना चाहिए। इस फैसले के बाद, गैलंट ने अपना बयान जारी करते हुए कहा कि वह इस पद से हटने के बावजूद देश की सेवा में लगे रहेंगे।
5. देश में विरोध और समर्थन
इस बर्खास्तगी पर इसराइल में व्यापक विरोध प्रदर्शन हो सकते हैं, जैसा कि पहले सरकार की न्यायिक सुधार योजना को लेकर हुआ था। गैलंट के समर्थकों का कहना है कि उनकी बर्खास्तगी लोकतंत्र के लिए एक बड़ी चोट है और यह केवल नेतन्याहू की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं के कारण हुआ है। वहीं, सरकार का पक्ष रखने वालों का कहना है कि गैलंट का कदम सेना और सरकार के बीच सामंजस्य को प्रभावित कर सकता था।
