लादेन के आखिरी गढ़ रहे शहर में पाकिस्तान ने लगाई आतंकी फैक्ट्री, सेना और ISI की निगरानी में चल रहा ट्रेनिंग कैंप, खुलासा
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के एबटाबाद शहर में, जहां अल-कायदा के पूर्व नेता ओसामा बिन लादेन को 2011 में अमेरिकी कमांडो ने मार गिराया था, अब एक नए आतंकी ट्रेनिंग कैंप की स्थापना की गई है। यह कैंप पाकिस्तानी सेना और इंटेलिजेंस ब्यूरो (ISI) की निगरानी में चल रहा है, जो देश में आतंकवाद के पुनरुत्थान की ओर इशारा करता है।
आतंकवादी ट्रेनिंग कैंप का खुलासा
- स्थान और गतिविधियाँ: एबटाबाद में स्थापित इस ट्रेनिंग कैंप में आतंकवादियों को युद्ध की तकनीकों, सुसाइड बमबारी, और निंदा करने वाले हमलों के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। यह कैंप एक ऐसे क्षेत्र में स्थित है जो पहले से ही आतंकवाद के लिए कुख्यात रहा है।
- प्रशिक्षण के प्रकार: रिपोर्टों के अनुसार, प्रशिक्षुओं को सामरिक कौशल, आईईडी बनाने, और जंगल में छिपने की तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह गतिविधियाँ आतंकवादी समूहों की बढ़ती ताकत को दर्शाती हैं।
सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका
- पाकिस्तानी सेना और ISI का सहयोग: सूत्रों के अनुसार, यह कैंप पाकिस्तानी सेना और ISI की स्वीकृति और निगरानी में संचालित हो रहा है। यह सुरक्षा बलों के आतंकवाद से निपटने के दावों पर सवाल उठाता है।
- आतंकवाद का समर्थन: विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के कैंप पाकिस्तान में आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे हैं और इसके लिए स्थानीय प्रशासन की सहमति भी हो सकती है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
- संयुक्त राष्ट्र की चिंताएँ: इस स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र, ने चिंता व्यक्त की है। इससे क्षेत्र में आतंकवाद और चरमपंथ के फिर से उभरने की संभावना बढ़ गई है।
- भारत और अफगानिस्तान का रुख: भारत और अफगानिस्तान दोनों देशों ने इस नए विकास को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की है, यह बताते हुए कि यह आतंकवाद के खिलाफ उनकी लड़ाई को और जटिल बना सकता है।
