हरियाणा में चला जादू, कश्मीर में ‘मोदी फैक्टर’ क्यों हुआ फेल? पाक एक्सपर्ट ने दी प्रतिक्रिया
हरियाणा में जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने प्रदर्शन से सभी को चौंकाया, वहीं कश्मीर घाटी में भाजपा की हार ने विश्लेषकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
हरियाणा में भाजपा की सफलता को कई लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करिश्माई नेतृत्व और केंद्रीय योजनाओं की सफलता का परिणाम मानते हैं। मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने राज्य में मजबूत संगठन और विकास के एजेंडे के साथ अपनी पकड़ मजबूत की। ‘मोदी फैक्टर’ यहां बखूबी काम करता दिखा, जिससे पार्टी ने बड़े पैमाने पर समर्थन हासिल किया।
कश्मीर घाटी में मोदी फैक्टर क्यों हुआ फेल?
दूसरी ओर, जम्मू-कश्मीर की स्थिति एकदम उलट रही। यहां भाजपा को घाटी में हार का सामना करना पड़ा, और इसके पीछे कई कारण गिनाए जा रहे हैं। पाकिस्तानी राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कश्मीर की अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियाँ भाजपा के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हुईं।
1. स्थानीय मुद्दे और राजनीति:
कश्मीर में भाजपा की हार का मुख्य कारण स्थानीय मुद्दों पर ध्यान न देना है। स्थानीय पार्टियां, जैसे नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी, लंबे समय से कश्मीर के लोगों के करीब रही हैं और उनके मुद्दों को बेहतर ढंग से समझती हैं। कश्मीर की जनता ने इन दलों को अपनी समस्याओं का समाधान करने में ज्यादा सक्षम माना।
2. धारा 370 का प्रभाव:
धारा 370 को हटाने के बाद से कश्मीर में भाजपा के प्रति असंतोष बढ़ा है। कश्मीरी जनता इसे अपनी पहचान और स्वायत्तता पर हमला मानती है। इस कारण से भाजपा के खिलाफ विरोध का माहौल बना, जिसने पार्टी को घाटी में कमजोर किया।
3. धार्मिक और सांस्कृतिक विभाजन:
कश्मीर में भाजपा को एक हिंदूवादी पार्टी के रूप में देखा जाता है, जो मुसलमानों के बहुल क्षेत्र में समर्थन जुटाने में असफल रही। स्थानीय संस्कृति और धार्मिक पहचान के आधार पर भाजपा को समर्थन मिलना मुश्किल हुआ।
4. पाकिस्तानी विशेषज्ञों की राय:
पाकिस्तानी एक्सपर्ट्स का कहना है कि कश्मीर की जनता भाजपा की नीतियों से खुद को अलग महसूस करती है। उनका मानना है कि मोदी सरकार का आक्रामक राष्ट्रवाद और पाकिस्तान के खिलाफ कड़ी नीतियां कश्मीरियों के बीच भाजपा की छवि को नुकसान पहुंचा रही हैं।
