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महाकुंभ भगदड़ की न्यायिक जांच शुरू, एक माह में रिपोर्ट सौंपेगा आयोग

मौनी अमावस्या (29 जनवरी) के अवसर पर प्रयागराज महाकुंभ में भगदड़ की दुखद घटना की जांच के लिए गठित न्यायिक आयोग ने अपना काम शुरू कर दिया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना के तुरंत बाद जांच आयोग बनाने की घोषणा की थी।

राज्यपाल द्वारा लोकहित में जांच को आवश्यक बताते हुए आयोग के गठन को मंजूरी दी गई। इस तीन-सदस्यीय जांच आयोग की अध्यक्षता इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति हर्ष कुमार कर रहे हैं। उनके साथ सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी वी.के. गुप्ता और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डी.के. सिंह बतौर सदस्य शामिल हैं।


🔹 आयोग को जांच के लिए दिए गए मुख्य बिंदु

📌 भगदड़ के कारणों और परिस्थितियों की पहचान करना।
📌 ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुझाव देना।
📌 प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करना।

आयोग को एक माह के भीतर रिपोर्ट सौंपनी होगी, हालांकि आवश्यकतानुसार इसकी अवधि बढ़ाई जा सकती है।


🔹 महाकुंभ भगदड़ में 30 की मौत, मुख्यमंत्री ने की मुआवजे की घोषणा

📌 मौनी अमावस्या स्नान के दौरान महाकुंभ में अचानक भगदड़ मच गई, जिसमें 30 श्रद्धालुओं की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए।
📌 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए पीड़ितों के परिवारों को 25-25 लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की।
📌 मुख्यमंत्री ने वीडियो संदेश जारी कर कहा,

“महाकुंभ, प्रयागराज में हुई घटना अत्यंत दुखद और मर्माहत करने वाली है। मृतकों को विनम्र श्रद्धांजलि व मेरी संवेदनाएं शोक संतप्त परिजनों के साथ हैं।”

महाकुंभ जैसे विशाल आयोजनों में भीड़ नियंत्रण सबसे बड़ी चुनौती होती है। न्यायिक जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगामी आयोजनों के लिए नई रणनीति बनाई जाएगी, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

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