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भारत में महिला उद्यमिता को बढ़ावा: बिजनेस लोन और क्रेडिट जागरूकता में तेजी

भारत में महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सशक्तिकरण अहम भूमिका निभा रहा है। हाल ही में जारी एक नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2024 तक 27 मिलियन महिलाएं अपने क्रेडिट स्कोर की निगरानी कर रही थीं, जो 2023 की तुलना में 42% की वृद्धि दर्शाता है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि महिलाएं अब बिजनेस लोन के लिए अधिक आत्मनिर्भर और जागरूक हो रही हैं

महिलाओं की क्रेडिट जागरूकता में बड़ा उछाल

रिपोर्ट के मुताबिक:
महिला उधारकर्ताओं की संख्या में 42% की सालाना वृद्धि देखी गई।
गैर-मेट्रो क्षेत्रों में 48% और मेट्रो शहरों में 30% की वृद्धि दर्ज की गई।
महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना की महिलाओं ने कुल स्व-निगरानी का 49% हिस्सा बनाया।
दक्षिण भारत में 10.2 मिलियन महिलाएं क्रेडिट स्कोर मॉनिटर कर रही हैं

बिजनेस लोन में महिलाओं की बढ़ती हिस्सेदारी

महिला उधारकर्ताओं में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है:

  • 2019 से बिजनेस लोन में महिलाओं की हिस्सेदारी 14% बढ़ी
  • गोल्ड लोन में उनकी हिस्सेदारी 6% बढ़ी
  • दिसंबर 2024 तक महिला बिजनेस उधारकर्ताओं की भागीदारी 35% तक पहुंच गई

उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में महिला उद्यमियों की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है, जिससे यह साफ है कि महिलाएं अब न केवल लोन ले रही हैं बल्कि आर्थिक गतिविधियों में भी सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं

वित्तीय साक्षरता और सरकारी सहयोग का योगदान

नीति आयोग के महिला उद्यमिता मंच (WEP) और ट्रांसयूनियन सिबिल की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकार और वित्तीय संस्थानों की सक्रिय भागीदारी के कारण महिलाओं को अब लोन और अन्य वित्तीय सेवाएं आसानी से मिल रही हैं

नीति आयोग के सीईओ बी.वी.आर. सुब्रह्मण्यम ने कहा:
“वित्त तक पहुंच महिला उद्यमिता के लिए एक महत्वपूर्ण कारक है। महिला उद्यमिता मंच (WEP) वित्तीय साक्षरता, ऋण तक पहुंच, मार्गदर्शन और बाजार कनेक्शन को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रहा है।”

फाइनेंसिंग वूमेन कोलैबोरेटिव: महिला उद्यमियों के लिए नई पहल

सरकार ने “फाइनेंसिंग वूमेन कोलैबोरेटिव” पहल की शुरुआत की है, जिसमें वित्तीय संस्थानों और अन्य हितधारकों को शामिल किया जा रहा है ताकि:
महिला उद्यमियों को आसान वित्तीय सहायता मिले
क्रेडिट स्कोर की निगरानी और जागरूकता को बढ़ाया जाए
महिलाओं को स्वावलंबी और आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जाए

महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और वित्तीय जागरूकता में तेजी से सुधार हो रहा हैसरकारी योजनाओं, क्रेडिट स्कोर मॉनिटरिंग और बिजनेस लोन की बढ़ती उपलब्धता के कारण अब महिलाएं अपने व्यवसाय को बढ़ाने के लिए आत्मनिर्भर बन रही हैं। आने वाले वर्षों में महिला उद्यमिता भारत की आर्थिक ग्रोथ का प्रमुख हिस्सा बन सकती है

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