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केंद्र सरकार की पहल: तुअर, उड़द और मसूर की एमएसपी पर खरीद में तेजी

केंद्र सरकार द्वारा किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर तुअर (अरहर) की खरीद में तेजी आई है। 11 मार्च तक आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र और तेलंगाना सहित प्रमुख उत्पादक राज्यों में कुल 1.31 लाख मीट्रिक टन तुअर की खरीद की गई। इससे 89,219 किसानों को लाभ मिला। यह जानकारी गुरुवार को कृषि मंत्रालय द्वारा जारी की गई।

इंटीग्रेटेड पीएम-आशा योजना को 2025-26 तक जारी रखने की मंजूरी

भारत सरकार ने 15वें वित्त आयोग चक्र के दौरान 2025-26 तक इंटीग्रेटेड प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) योजना को जारी रखने की मंजूरी दी है

इस योजना का मुख्य उद्देश्य:

  • किसानों को उनकी उपज के लिए लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करना।
  • उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर खाद्य उत्पाद उपलब्ध कराना।
  • आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में स्थिरता बनाए रखना।

इस योजना के तहत, केंद्रीय नोडल एजेंसियों द्वारा राज्य स्तरीय एजेंसियों के माध्यम से प्री-रजिस्टर्ड किसानों से एमएसपी पर अधिसूचित दलहन, तिलहन और खोपरा की खरीद की जाती है

तुअर, उड़द और मसूर की खरीद को मिली स्वीकृति

सरकार ने 2024-25 के खरीद वर्ष के लिए मूल्य समर्थन योजना (PSS) के तहत तुअर, उड़द और मसूर के पूरे उत्पादन की खरीद को मंजूरी दी है।

  • सरकार का लक्ष्य दालों में आत्मनिर्भरता हासिल करना है।
  • 2028-29 तक चार वर्षों के लिए, केंद्रीय नोडल एजेंसियों के माध्यम से राज्य के उत्पादन के लिए तुअर (अरहर), उड़द और मसूर की 100% खरीद सुनिश्चित की जाएगी।

इन राज्यों को मिली खरीद की मंजूरी

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खरीफ 2024-25 सीजन के लिए मूल्य समर्थन योजना के तहत तुअर (अरहर), मसूर और उड़द की खरीद की सीमा को मंजूरी दी:

स्वीकृत खरीद सीमा:

  • तुअर (अरहर): 13.22 एलएमटी
  • मसूर: 9.40 एलएमटी
  • उड़द: 1.35 एलएमटी

खरीद की मंजूरी प्राप्त राज्य:

  1. आंध्र प्रदेश
  2. छत्तीसगढ़
  3. गुजरात
  4. हरियाणा
  5. कर्नाटक
  6. मध्य प्रदेश
  7. महाराष्ट्र
  8. तेलंगाना
  9. उत्तर प्रदेश

एमएसपी पर खरीद के प्रभाव और किसानों को मिलने वाले लाभ

1. किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलेगा

एमएसपी पर खरीद की इस पहल से किसानों को उनकी फसल का सही मूल्य मिलेगा और उन्हें किसी भी बाजार अस्थिरता का सामना नहीं करना पड़ेगा।

2. आयात पर निर्भरता होगी कम

देश में दालों के उत्पादन को बढ़ावा देने और आत्मनिर्भरता लाने के लिए यह कदम उठाया गया है। इससे आयात पर निर्भरता कम होगी और विदेशी मुद्रा की बचत होगी

3. आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में स्थिरता

सरकार की यह पहल उपभोक्ताओं को उचित कीमत पर दालें उपलब्ध कराने में मदद करेगी, जिससे बाजार में अनावश्यक मूल्य वृद्धि नहीं होगी

4. छोटे और सीमांत किसानों को मिलेगा फायदा

इस योजना के तहत छोटे और सीमांत किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिलेगा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगाभविष्य की रणनीति और योजनाएँ

1. खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता

सरकार खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और तकनीकी नवाचारों का उपयोग कर रही है

2. किसानों की जागरूकता बढ़ाना

  • किसानों को सरकार की योजनाओं की जानकारी देने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
  • पीएम-आशा योजना के तहत एमएसपी पर होने वाली खरीद के बारे में किसानों को अधिक जानकारी प्रदान की जा रही है।

3. दालों के उत्पादन को और बढ़ाने के लिए विशेष योजनाएँ

  • सरकार नई तकनीक और अनुसंधान के माध्यम से दालों के उत्पादन को बढ़ाने की योजना बना रही है
  • किसानों को बेहतर बीज, उर्वरक और सिंचाई सुविधाओं के लिए सब्सिडी दी जाएगी।

केंद्र सरकार द्वारा एमएसपी पर तुअर, उड़द और मसूर की खरीद में तेजी लाने का फैसला किसानों के लिए एक बड़ी राहत है। यह न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को सुधारने में मदद करेगा, बल्कि भारत को दालों के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है

सरकार की यह योजना किसानों को उनके उत्पाद का सही मूल्य दिलाने, खाद्य सुरक्षा को बनाए रखने और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में स्थिरता लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी

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