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आयुष मंत्रालय का ‘प्रकृति परीक्षण अभियान’ बना ऐतिहासिक, 5 गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड किए हासिल

आयुष मंत्रालय द्वारा शुरू किए गए ‘प्रकृति परीक्षण अभियान’ ने भारत में समग्र स्वास्थ्य देखभाल को एक नई दिशा देने के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर आयुर्वेद को पहचान दिलाई है। इस अभियान के पहले चरण में 1.29 करोड़ से अधिक लोगों का प्रकृति परीक्षण किया गया, जिससे यह स्वास्थ्य और आयुर्वेद के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल बन गया है। इस अभियान ने पांच गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड भी अपने नाम किए, जो भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली की प्रभावशीलता और जनभागीदारी को दर्शाते हैं।

कैसे बना ‘प्रकृति परीक्षण अभियान’ ऐतिहासिक?

आयुष मंत्रालय के सहयोग से राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयोग (NCISM) ने इस अभियान को सफलतापूर्वक पूरा किया। गुरुवार को मुंबई में इस अभियान के पहले चरण का समापन समारोह आयोजित किया गया, जहां केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने अभियान की उपलब्धियों की सराहना की।

अभियान के तहत बने 5 गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड

1. एक सप्ताह में स्वास्थ्य अभियान के लिए सबसे अधिक प्रतिज्ञाएं:
6,004,912 प्रतिज्ञाएं दर्ज की गईं, जो कि न्यूनतम आवश्यकता 14,571 से कई गुना अधिक है। यह पहली बार है जब किसी स्वास्थ्य अभियान ने इतने बड़े पैमाने पर भागीदारी दर्ज कराई।

2. एक महीने में सबसे अधिक स्वास्थ्य प्रतिज्ञाएं:
➡ अभियान के दौरान 13,892,976 लोगों ने प्रतिज्ञा ली, जिसने चीन की सिग्ना और सीएमबी लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के 58,284 प्रतिज्ञाओं के पिछले रिकॉर्ड को तोड़ दिया।

3. सबसे अधिक कुल स्वास्थ्य प्रतिज्ञाएं:
➡ इस अभियान में 13,892,976 प्रतिज्ञाओं के साथ, भारत के जिफी एफडीसी लिमिटेड के पूर्व रिकॉर्ड 569,057 को पीछे छोड़ दिया।

4. डिजिटल प्रमाण पत्र साझा करने वाले लोगों का सबसे बड़ा ऑनलाइन फोटो एलबम:
➡ इसमें 62,525 फोटो शामिल किए गए, जो कि एक्सेंचर सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड (भारत) के पूर्व रिकॉर्ड 29,068 फोटो से कहीं अधिक है।

5. एक ही वाक्य बोलने वाले लोगों का सबसे बड़ा ऑनलाइन वीडियो एल्बम:
➡ इस अभियान में 12,798 वीडियो अपलोड किए गए, जिसने घे भरारी, राहुल कुलकर्णी और नीलम एडलाबडकर (भारत) के 8,992 वीडियो के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।

आयुष मंत्रालय की ऐतिहासिक पहल

केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है। इस अभियान ने साबित कर दिया कि आयुष पद्धति न केवल भारत में बल्कि विश्व स्तर पर भी स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।

प्रकृति परीक्षण अभियान का उद्देश्य

स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाना और आयुर्वेद को आधुनिक चिकित्सा प्रणाली में शामिल करना।
लोगों को उनकी शारीरिक प्रकृति (वात, पित्त, कफ) के आधार पर सही जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना।
आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली को वैश्विक पहचान दिलाना।
डिजिटल माध्यम से स्वास्थ्य अभियान में अधिक से अधिक लोगों को जोड़ना।

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