दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण के लिए पराली का न्यूनतम मूल्य तय करने की सिफारिश
“दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए संसद की एक समिति ने पराली जलाने की घटनाओं को कम करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण सिफारिश दी है। समिति ने धान की फसल अवशेषों (पराली) के लिए बेंचमार्क न्यूनतम मूल्य (एमएसपी जैसा) तय करने और जल्द तैयार होने वाली धान की फसल को अपनाने का सुझाव दिया है।“
🔹 यह रिपोर्ट राज्यसभा में अधीनस्थ विधान संबंधी समिति के अध्यक्ष मिलिंद मुरली देवड़ा ने पेश की। इस रिपोर्ट में पराली जलाने की रोकथाम के लिए ठोस समाधान सुझाए गए हैं।
🔹 पराली के लिए न्यूनतम मूल्य तय करने की सिफारिश
समिति ने सुझाव दिया है कि किसानों को पराली की बिक्री पर एक निश्चित आय की गारंटी देने के लिए पराली का न्यूनतम मूल्य तय किया जाए, ठीक वैसे ही जैसे अनाज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) निर्धारित किया जाता है।
समिति की प्रमुख सिफारिशें:
✔️ हर साल पराली के मूल्य की समीक्षा की जाए।
✔️ पराली भंडारण के लिए 20-50 किमी की दूरी पर स्टोरेज सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
✔️ किसानों पर पराली ढुलाई का ज्यादा बोझ न पड़े, इसके लिए अंतिम उपभोक्ताओं को पास में रखा जाए।
🔹 इससे किसानों को पराली जलाने की बजाय उसे बेचने के लिए एक वित्तीय प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे वायु प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी।
🔹 पराली जलाने की मुख्य वजह और समाधान
समिति ने पराली जलाने की मुख्य वजह पर ध्यान केंद्रित किया। रिपोर्ट में कहा गया कि धान की कटाई के बाद किसानों के पास रबी की फसल की बुवाई के लिए मात्र 25 दिन का समय होता है, जिसके कारण वे पराली जलाने के लिए मजबूर होते हैं।
समाधान के रूप में समिति ने सुझाया:
✔️ पूसा-44 जैसी जल्दी तैयार होने वाली धान की किस्मों को प्रोत्साहित किया जाए।
✔️ रबी फसल की बुवाई के लिए किसानों को अधिक समय मिले, इसके लिए वैकल्पिक खेती को बढ़ावा दिया जाए।
✔️ बायोमास ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए व्यापक नीति बनाई जाए।
🔹 अगर यह नीति लागू होती है, तो किसानों को पराली जलाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी, जिससे प्रदूषण में भारी कमी आएगी।
🔹 जैव ऊर्जा उत्पादन के लिए एकीकृत राष्ट्रीय नीति का सुझाव
समिति ने कृषि अपशिष्ट से जैव ऊर्जा उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए एक राष्ट्रीय नीति बनाने की सिफारिश की है।
इस नीति को तैयार करने के लिए निम्नलिखित मंत्रालयों को शामिल करने का सुझाव दिया गया:
✔️ कृषि मंत्रालय
✔️ नवीन एवं नवीनीकृत ऊर्जा मंत्रालय
✔️ पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय
✔️ पर्यावरण मंत्रालय
✔️ उद्योग और स्वास्थ्य मंत्रालय
🔹 इस नीति का उद्देश्य पराली को एक ऊर्जा स्रोत में बदलना और उसे प्रदूषण फैलाने वाले कचरे से एक उपयोगी संसाधन में परिवर्तित करना है।
🔹 रेड एंट्री नियमों में बदलाव का सुझाव
वर्तमान में, पराली जलाने वाले किसानों को “रेड एंट्री” सूची में डाला जाता है, जिससे वे विभिन्न सरकारी योजनाओं और वित्तीय लाभों से वंचित हो जाते हैं।
समिति ने रेड एंट्री के नियमों में सुधार की सिफारिश की:
✔️ अगर कोई किसान दोबारा पराली नहीं जलाता है, तो एक निश्चित समय बाद उसका नाम रेड एंट्री से हटाया जाए।
✔️ पराली के पर्यावरण-अनुकूल निष्पादन का प्रमाण देने पर किसान स्वयं अपना नाम हटाने की प्रक्रिया शुरू कर सके।
✔️ छोटे और सीमांत किसानों की स्पष्ट परिभाषा तय की जाए।
✔️ कार्रवाई और जुर्माने से जुड़े नियमों में स्पष्टता लाई जाए।
🔹 इससे किसानों को राहत मिलेगी और वे पराली को जलाने की बजाय वैकल्पिक समाधान अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।
इस रिपोर्ट की सिफारिशों का मुख्य उद्देश्य:
✅ पराली जलाने की घटनाओं को रोकना
✅ पराली के लिए न्यूनतम मूल्य तय करना
✅ जल्द तैयार होने वाली धान की फसल को बढ़ावा देना
✅ बायोमास ऊर्जा उत्पादन को प्रोत्साहित करना
✅ किसानों को “रेड एंट्री” सूची से बाहर निकलने का विकल्प देना
