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आईआईटी गुवाहाटी के वैज्ञानिकों ने तैयार किया पारे का सटीक पता लगाने वाला नैनोमटेरियल

आईआईटी गुवाहाटी के वैज्ञानिकों ने एक विशेष प्रकार का नैनोमटेरियल विकसित किया है, जो पारे जैसी खतरनाक धातु का सटीक और प्रभावी तरीके से पता लगाने में सक्षम है। यह तकनीक न केवल मानव कोशिकाओं के भीतर बल्कि पर्यावरण में भी पारे की उपस्थिति की पहचान करने में मदद करेगी।”

पारे से जुड़ी समस्या और इसका समाधान

पारा एक जहरीला धातु है, जो दूषित पानी, भोजन, हवा या त्वचा के संपर्क से शरीर में प्रवेश कर सकता है। यह तंत्रिका तंत्र, किडनी और दिल जैसे महत्वपूर्ण अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। आईआईटी गुवाहाटी के शोधकर्ताओं द्वारा तैयार किए गए नैनोमटेरियल्स इस समस्या का समाधान प्रदान करते हैं।

कैसे काम करता है नैनोमटेरियल?

आईआईटी गुवाहाटी के भौतिकी विभाग के प्रोफेसर सैकत भौमिक ने बताया कि यह नैनोमटेरियल धातु हैलाइड पेरोवस्काइट नैनोक्रिस्टल्स पर आधारित है। इसके मुख्य बिंदु हैं:

  1. संवेदनशीलता: यह नैनोक्रिस्टल्स पारे की मामूली मात्रा का भी सटीक पता लगाने में सक्षम हैं।
  2. हरी रोशनी का उत्सर्जन: ये नैनोक्रिस्टल्स हरी रोशनी उत्सर्जित करते हैं, जिससे पारे की पहचान आसान हो जाती है।
  3. कोशिकाओं को कोई नुकसान नहीं: यह मटेरियल मानव कोशिकाओं के लिए सुरक्षित है और पारंपरिक इमेजिंग तकनीकों से बेहतर तस्वीरें प्रदान करता है।

अन्य उपयोग

यह नैनोमटेरियल सिर्फ पारे की पहचान तक सीमित नहीं है। इसे अन्य जहरीली धातुओं की पहचान, दवाओं के वितरण, और इलाज की प्रभावशीलता को रीयल-टाइम में मॉनिटर करने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

पर्यावरण के लिए बड़ी उपलब्धि

शोधकर्ताओं ने इस मटेरियल को सिलिका और पॉलिमर की कोटिंग से स्थिर बनाया है, जिससे यह पानी में लंबे समय तक प्रभावी बना रहता है। इसका उपयोग प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

आईआईटी गुवाहाटी के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित यह नैनोमटेरियल विज्ञान और पर्यावरण के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि है। यह तकनीक न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है, बल्कि प्रदूषण से निपटने में भी मददगार साबित होगी।

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