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भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 638 बिलियन डॉलर, अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर आई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 7.6 बिलियन डॉलर बढ़कर 638 बिलियन डॉलर हो गया है। यह लगातार तीसरा सप्ताह है जब भंडार में वृद्धि दर्ज की गई है। इससे पहले, 31 जनवरी 2025 तक भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 630.6 बिलियन डॉलर था।

विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी से भारतीय रुपये की स्थिरता बनी रहती है।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार में देश की स्थिति मजबूत होती है।
विदेशी निवेशकों के लिए भारत आकर्षक निवेश गंतव्य बनता है।

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार क्यों बढ़ा?

7 फरवरी को समाप्त सप्ताह में, विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां (Foreign Exchange Assets) जो कुल भंडार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, 6.42 बिलियन डॉलर बढ़कर 544.10 बिलियन डॉलर हो गईं।

इसके अलावा, सोने का भंडार भी 1.3 बिलियन डॉलर बढ़कर 72.2 बिलियन डॉलर हो गया। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने नवंबर 2024 में 8 टन सोना खरीदा था। इसी दौरान दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने कुल 53 टन सोने की खरीदारी की थी।

भारत की कुल सोने की होल्डिंग 876 टन हो गई है, जिससे वह पोलैंड के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना खरीदने वाला देश बन गया है।

विदेशी मुद्रा भंडार का भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर

रुपये की स्थिरता: विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ने से रुपये की स्थिरता बनी रहती है और डॉलर के मुकाबले इसकी स्थिति मजबूत होती है।
बाहरी झटकों से सुरक्षा: यह भंडार वैश्विक अनिश्चितताओं और आर्थिक संकट के समय भारत की रक्षा करता है।
आयात भुगतान की सुरक्षा: भंडार बढ़ने से आयात करने के लिए पर्याप्त विदेशी मुद्रा उपलब्ध रहती है।
विदेशी निवेश को प्रोत्साहन: भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था निवेशकों के लिए आकर्षक बनती है, जिससे FDI (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) और FPI (विदेशी पोर्टफोलियो निवेश) में वृद्धि होती है

RBI ने रेपो दर घटाकर 6.25% की, क्या होगा फायदा?

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी ताजा मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो दर 25 आधार अंकों से घटाकर 6.25% कर दी है।

यह पांच वर्षों में पहली बार हुआ है कि RBI ने ब्याज दरों में कटौती की है।

रेपो दर कटौती के फायदे:

लोन होंगे सस्ते: होम लोन, कार लोन और बिजनेस लोन की ब्याज दरें कम होंगी।
खर्च और निवेश बढ़ेगा: लोग अधिक खरीदारी करेंगे, जिससे बाजार में मांग बढ़ेगी।
स्टार्टअप और उद्यमियों को राहत: नए व्यवसाय शुरू करने के लिए आसान वित्तीय सहायता मिलेगी।
रियल एस्टेट सेक्टर को बढ़ावा: घर खरीदने वाले लोगों को सस्ता लोन मिलेगा, जिससे रियल एस्टेट बाजार में तेजी आएगी।

बढ़ता विदेशी मुद्रा भंडार, स्थिर रुपया और सस्ती ब्याज दरें भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देंगी।
मौद्रिक नीति में सुधार से घरेलू बाजार में निवेश और खपत को बढ़ावा मिलेगा।
भारत का आर्थिक विकास 2025 में नई ऊंचाइयों पर पहुंचने की संभावना है।

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