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भारत-जापान साझेदारी: आर्थिक सहयोग से सांस्कृतिक संबंधों तक

भारत और जापान के बीच मजबूत आर्थिक और सांस्कृतिक संबंध हैं, जो वर्षों से निरंतर प्रगति कर रहे हैं। वर्ष 2000 से 2024 तक, जापान ने भारत में 43 अरब डॉलर से अधिक का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) किया है, जिससे यह भारत का पांचवां सबसे बड़ा विदेशी निवेशक बन गया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने यह जानकारी भारत-जापान इकोनॉमी एंड इन्वेस्टमेंट फोरम को संबोधित करते हुए दी।

भारत-जापान साझेदारी: निवेश और व्यापार में बढ़ोतरी

2000 से 2024 तक जापान ने भारत में 43 अरब डॉलर से अधिक निवेश किया।
भारत में 1,400 से अधिक जापानी कंपनियां कार्यरत हैं।
8 राज्यों में 11 इंडस्ट्रियल टाउनशिप जापानी उद्योगों के लिए तैयार की गई हैं।
कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) ने व्यापार को बढ़ावा दिया है।

दोनों देशों के संबंध ‘सुशी और मसालों’ जैसे हैं

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भारत और जापान की साझेदारी को “सुशी और मसालों” के रूप में वर्णित किया। उन्होंने कहा कि दोनों देश अपनी अलग-अलग विशेषताओं के बावजूद एक-दूसरे के पूरक हैं।

भारत और जापान का संबंध लोकतंत्र, संस्कृति और आर्थिक सहयोग पर आधारित है। जापान के ‘सात भाग्यशाली देवताओं’ की उत्पत्ति भी भारतीय परंपरा से हुई है, जो दोनों देशों के गहरे सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाता है।

जापान की मदद से भारत में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट

मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट) में जापान की भागीदारी।
दिल्ली, अहमदाबाद, बेंगलुरु और चेन्नई के मेट्रो सिस्टम में जापान का सहयोग।
मारुति सुजुकी जैसी कंपनियों ने वैश्विक ब्रांड के रूप में पहचान बनाई।
भारत और जापान मिलकर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी ब्रांड्स बना रहे हैं।

भारत-जापान संबंधों का भविष्य

भारत और जापान की यह साझेदारी दोनों देशों की अर्थव्यवस्था और व्यापार के विस्तार में मदद कर रही है। जापान के निवेश से भारत में नौकरी के नए अवसर, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास को बल मिल रहा है।

दोनों देशों के सहयोग से आने वाले समय में मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी और रेलवे के क्षेत्र में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे।

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