जस्टिन ट्रूडो ने कनाडा के प्रधानमंत्री पद से दिया इस्तीफा, भारत-कनाडा रिश्तों में सुधार की उम्मीद
“कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने सोमवार को लिबरल पार्टी के नेता और प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। नए लिबरल नेता के चुने जाने तक ट्रूडो प्रधानमंत्री बने रहेंगे। ट्रूडो ने साल 2015 में कनाडा के प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला था। लेकिन उनकी नीतियों और फैसलों के चलते वह अपने ही देश में अलोकप्रिय हो गए थे, जिसके कारण लिबरल पार्टी के भीतर उन पर इस्तीफे का दबाव बढ़ता गया।”
लंबे समय से ट्रूडो पर था इस्तीफे का दबाव
जस्टिन ट्रूडो के खिलाफ उनकी पार्टी में लंबे समय से असंतोष पनप रहा था। उनकी नीतियों और खालिस्तान समर्थकों को लेकर नरम रुख के कारण उनके इस्तीफे की मांग लगातार बढ़ रही थी। उनकी लोकप्रियता में गिरावट के चलते 2024 में पार्टी के भीतर भी उन्हें पद छोड़ने का सुझाव दिया जा रहा था।
ट्रंप-ट्रूडो के रिश्ते हमेशा रहे विवादित
जस्टिन ट्रूडो का कार्यकाल डोनाल्ड ट्रंप के साथ रिश्तों को लेकर भी चर्चा में रहा। ट्रंप ने कई बार ट्रूडो पर तंज कसते हुए उन्हें ‘कनाडा का गवर्नर’ कहा। ट्रंप और ट्रूडो के बीच संबंध कभी भी सामान्य नहीं रहे। ट्रंप ने कनाडा पर 25% टैरिफ लगाने की धमकी भी दी थी, जिससे दोनों देशों के रिश्ते और खराब हो गए थे।
कौन बनेगा कनाडा का नया प्रधानमंत्री?
ट्रूडो के इस्तीफे के बाद सवाल यह उठ रहा है कि उनकी जगह लिबरल पार्टी का अगला नेता कौन होगा। अक्टूबर में होने वाले चुनावों से पहले पार्टी को नया नेता चुनना होगा। संभावित दावेदारों में क्रिस्टिया फ्रीलैंड, मार्क कार्नी, और मेलनी जोली के नाम चर्चा में हैं।
भारत-कनाडा संबंधों में सुधार की उम्मीद
ट्रूडो के इस्तीफे के बाद भारत-कनाडा के रिश्तों में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच कड़वाहट बढ़ गई थी। ट्रूडो की खालिस्तान समर्थक नेताओं से करीबी के कारण भारत और कनाडा के रिश्ते लगातार बिगड़ते गए।
विशेषज्ञों का मानना है कि कंजर्वेटिव पार्टी के नेता पियरे पोइलिवरे के प्रधानमंत्री बनने की संभावना है। पोइलिवरे भारत के साथ अच्छे रिश्तों के पक्षधर हैं। अगर वह प्रधानमंत्री बने, तो भारत-कनाडा के रिश्तों में सुधार की संभावना बढ़ सकती है।
कैसे बिगड़े भारत-कनाडा संबंध?
- 2018 में भारत दौरा:
ट्रूडो की भारत यात्रा के दौरान कनाडा के उच्चायोग ने खालिस्तानी आतंकवादी जसपाल अटवाल को भोज पर आमंत्रित किया। यह घटना विवादों में रही और इससे दोनों देशों के रिश्तों में खटास आई। - 2020 में किसान आंदोलन:
किसान आंदोलन के दौरान ट्रूडो ने भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करते हुए टिप्पणी की, जिससे भारत सरकार नाराज हुई। - हरदीप सिंह निज्जर की हत्या:
2023 में खालिस्तानी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद ट्रूडो ने बिना सबूत भारत पर हत्या में शामिल होने का आरोप लगाया। इसके बाद भारत ने कनाडा से राजनयिकों को निष्कासित कर दिया और दोनों देशों के रिश्ते और खराब हो गए।
भारत ने दी थी कड़ी प्रतिक्रिया
ट्रूडो के आरोपों के बाद भारत ने कनाडाई राजनयिकों को वापस बुला लिया और कनाडा में भारतीय मिशनों को सुरक्षा मुहैया करवाई। इसके अलावा भारत ने कनाडा को यह साफ संदेश दिया कि भारत की संप्रभुता से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
