लोकसभा में छह नई भाषाओं में अनुवाद सेवाओं का विस्तार, स्पीकर ओम बिरला ने की घोषणा
“लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार को संसद में छह नई भाषाओं में अनुवाद सेवाएं शुरू करने की घोषणा की। इन नई भाषाओं में बोडो, डोगरी, मैथिली, मणिपुरी, उर्दू और संस्कृत को शामिल किया गया है। इससे पहले, हिंदी और अंग्रेजी के अलावा 10 अन्य भाषाओं में अनुवाद सेवाएं उपलब्ध थीं।“
पहले किन भाषाओं में उपलब्ध थीं अनुवाद सेवाएं?
लोकसभा में पहले जिन 10 भाषाओं में अनुवाद सेवाएं मिल रही थीं, वे हैं:
✅ असमिया
✅ बंगाली
✅ गुजराती
✅ कन्नड़
✅ मलयालम
✅ मराठी
✅ उड़िया
✅ पंजाबी
✅ तमिल
✅ तेलुगु
अब इन भाषाओं के साथ छह नई भाषाओं को जोड़ा गया है, जिससे लोकसभा में भाषाई विविधता और लोकतांत्रिक समावेशिता को बढ़ावा मिलेगा।
🔹 भारत की संसदीय प्रणाली और भाषाई समावेशिता
स्पीकर ओम बिरला ने लोकसभा में कहा,
“हमारा प्रयास है कि संसद में सभी 22 आधिकारिक भाषाओं में अनुवाद सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं। जब मैंने वैश्विक मंच पर इस बात का जिक्र किया कि हम भारत में 22 भाषाओं में अनुवाद का प्रयास कर रहे हैं, तो सभी ने इसकी सराहना की।”
उन्होंने यह भी बताया कि भविष्य में और 16 भाषाओं को शामिल करने का प्रयास किया जाएगा, जब पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध होंगे।
🔹 डीएमके सांसद ने संस्कृत भाषा पर उठाया सवाल
लोकसभा अध्यक्ष की इस घोषणा पर डीएमके सांसद दयानिधि मारन ने संस्कृत भाषा को शामिल करने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा,
“संस्कृत को जनगणना के अनुसार केवल 70,000 लोग बोलते हैं। यह किसी भी राज्य में बोली नहीं जाती, फिर करदाताओं का पैसा इस पर क्यों बर्बाद किया जा रहा है?”
मारन ने आरोप लगाया कि संस्कृत को शामिल करने का निर्णय आरएसएस की विचारधारा से प्रेरित हो सकता है।
🔹 लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की प्रतिक्रिया
इस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा,
“आप किस देश में रह रहे हैं?”
संस्कृत को शामिल करने के बचाव में उन्होंने कहा कि यह भारत की प्राचीन भाषा है और इसे संसद में अनुवाद सेवा का हिस्सा बनाना भारतीय संस्कृति और विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
🔹 क्यों महत्वपूर्ण है भाषाओं का विस्तार?
संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल सभी भाषाओं को समान अवसर देने का प्रयास
लोकसभा में अधिक भाषाओं में संवाद की सुविधा, जिससे क्षेत्रीय नेताओं को मदद मिलेगी
विविधता और लोकतंत्र की मजबूती, जिससे संसद अधिक समावेशी बनेगी
सभी भारतीय भाषाओं को समान दर्जा देने की पहल, जिससे भाषाई संतुलन बनेगा
🔹 लोकसभा में अनुवाद सेवाओं का विस्तार लोकतंत्र की मजबूती की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।
🔹 संस्कृत सहित अन्य भाषाओं को जोड़ना भारतीय विरासत को संजोने की पहल है।
🔹 कुछ सांसदों की आपत्ति के बावजूद, लोकसभा अध्यक्ष ने इसे आवश्यक सुधार बताया।
