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एसबीआई 2055 तक होगा नेट जीरो, ग्रीन मैराथन में हजारों धावकों ने लिया हिस्सा

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने अपने शताब्दी वर्ष 2055 तक नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है। एसबीआई के चेयरमैन चल्ला श्रीनिवासुलु सेट्टी ने इस बड़े लक्ष्य की घोषणा ‘एसबीआई ग्रीन मैराथन सीजन-5’ के दौरान की। इस खास मौके पर 10 हजार से अधिक रनर्स ने पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ दौड़ लगाई।

एसबीआई ग्रीन मैराथन का मकसद

साल 2018 से लगातार आयोजित की जा रही एसबीआई ग्रीन मैराथन बैंक के ‘मिशन लाइफ: पर्यावरण के लिए जीवन शैली’ के प्रति समर्पण का प्रतीक बन चुकी है। यह मैराथन स्थायी भविष्य और पर्यावरण संरक्षण के लिए एसबीआई की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

मैराथन में हजारों ने दौड़ लगाकर दिया संदेश

एसबीआई ग्रीन मैराथन सीजन-5 में 5 किमी, 10 किमी और 21 किमी की कैटेगरी में 10,000 से ज्यादा प्रतिभागी शामिल हुए। चेयरमैन चल्ला श्रीनिवासुलु सेट्टी ने रनर्स को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जिससे पर्यावरण संरक्षण का संदेश दूर-दूर तक पहुंचा।

विजेताओं को नकद पुरस्कार

प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को नकद पुरस्कार भी मिले:

  • 21 किमी दौड़ के शीर्ष विजेताओं को क्रमशः 15,000, 10,000 और 7,000 रुपये
  • 10 किमी दौड़ के शीर्ष प्रतिभागियों को क्रमशः 10,000, 7,000 और 5,000 रुपये

अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन से मिला प्रोत्साहन

एसोसिएशन ऑफ इंटरनेशनल मैराथन एंड डिस्टेंस रेस (AIMS) के प्रमाणन से इस आयोजन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली। इससे प्रतिभागियों को विश्वस्तरीय मैराथन समुदाय में पहचान मिली।

अनुभवी धावकों ने बढ़ाया हौसला

कार्यक्रम में दिग्गज धावकों विनोद कुमार शर्मा, बरुन कुमार, विशाक कृष्णस्वामी और आशीष आर्य ने भाग लेकर प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ाया और उन्हें लगातार फिट रहने के लिए प्रेरित किया।

नेट जीरो का अर्थ क्या है?

नेट जीरो का मतलब है कि बैंक जितना कार्बन उत्सर्जन करेगा, उतनी ही मात्रा में कार्बन उत्सर्जन घटाने की पहल भी करेगा। यह लक्ष्य पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के मुकाबले में बड़ा योगदान देगा।

एसबीआई का यह प्रयास दूसरे संगठनों और आम लोगों के लिए पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने की प्रेरणा बन सकता है।

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