सेवा भोज योजना: धार्मिक और धर्मार्थ संस्थाओं को मिलेगा जीएसटी वापसी का लाभ
“केंद्र सरकार द्वारा सेवा भोज योजना के तहत धार्मिक और धर्मार्थ संस्थाओं को एक बड़ा लाभ दिया जा रहा है। इस योजना के तहत, मुफ्त भोजन वितरण के लिए उपयोग किए जाने वाले कच्चे खाद्य पदार्थों पर लगे जीएसटी की प्रतिपूर्ति केंद्र सरकार द्वारा की जाती है।“
संस्कृति मंत्रालय ने अगस्त 2018 में इस योजना की शुरुआत की थी, ताकि उन धर्मार्थ और धार्मिक संगठनों को सहायता दी जा सके, जो निशुल्क भोजन वितरण करते हैं।
🔹 सेवा भोज योजना के तहत मिलने वाले लाभ
जीएसटी प्रतिपूर्ति: धार्मिक/धर्मार्थ संस्थाओं को उनके द्वारा खरीदी गई कुछ विशिष्ट कच्ची खाद्य सामग्रियों पर केंद्रीय जीएसटी (CGST) और एकीकृत जीएसटी (IGST) की प्रतिपूर्ति दी जाएगी।
मुफ्त भोजन वितरण: यह योजना उन संस्थाओं के लिए लागू है, जो कम से कम 5000 लोगों को हर महीने निशुल्क भोजन वितरित करती हैं।
सभी धर्मों और समुदायों को समान लाभ: सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि सभी धार्मिक समुदायों को इस योजना का लाभ मिले।
🔹 सेवा भोज योजना के लिए पात्रता शर्तें
इस योजना का लाभ उठाने के लिए धर्मार्थ और धार्मिक संस्थाओं को नीचे दिए गए नियमों का पालन करना होगा:
संस्था का प्रमाण पत्र: जिला मजिस्ट्रेट (DM) से यह प्रमाणित होना चाहिए कि संस्था पिछले तीन वर्षों से निशुल्क भोजन वितरण कर रही है।
5000 से अधिक लोगों को मासिक भोजन वितरण: योजना के तहत केवल उन्हीं संस्थाओं को शामिल किया गया है, जो एक महीने में कम से कम 5000 लोगों को निशुल्क भोजन उपलब्ध कराती हैं।
पंजीकरण आवश्यक: संस्था को नीति आयोग के NGO दर्पण पोर्टल और संस्कृति मंत्रालय के CSM पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा।
विशिष्ट पहचान संख्या (UIN): आवेदन जमा करने के बाद संस्था को नोडल कर अधिकारी द्वारा विशिष्ट पहचान संख्या (UIN) प्रदान की जाएगी।
🔹 सेवा भोज योजना का लाभ कैसे प्राप्त करें?
NGO दर्पण पोर्टल पर पंजीकरण करें।
संस्कृति मंत्रालय के CSM पोर्टल पर आवेदन करें।
आवेदन को राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के नोडल कर अधिकारी को जमा करें।
नोडल अधिकारी आवेदन की समीक्षा करके UIN (विशिष्ट पहचान संख्या) प्रदान करेगा।
संस्थान द्वारा खरीदी गई खाद्य सामग्री का रिकॉर्ड बनाए रखें।
सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ प्रतिपूर्ति का दावा करें।
🔹 पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था
केंद्र सरकार ने सेवा भोज योजना के तहत वित्तीय सहायता में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रक्रिया अपनाई है:
🔹 सभी धर्मार्थ संस्थाओं को पंजीकरण कराना अनिवार्य।
🔹 संस्कृति मंत्रालय और राज्य सरकारें निगरानी करेंगी।
🔹 GST प्रतिपूर्ति केवल उन्हीं संस्थाओं को मिलेगी, जो शर्तों का पालन करेंगी।
🔹 सेवा भोज योजना के तहत धार्मिक और धर्मार्थ संगठनों को उनके निशुल्क भोजन वितरण कार्यक्रमों में सहायता दी जा रही है।
🔹 यह योजना सुनिश्चित करती है कि मुफ्त भोजन वितरण में कोई रुकावट न आए और अधिक से अधिक जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध हो सके।
🔹 संस्कृति मंत्रालय इस योजना का अधिक से अधिक प्रचार कर रहा है, ताकि सभी पात्र संस्थाएं इसका लाभ उठा सकें।
