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सिद्धिविनायक मंदिर में लागू हुआ ड्रेस कोड, स्कर्ट और रिवीलिंग ड्रेस पर प्रतिबंध

मुंबई के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर ने भक्तों के लिए ड्रेस कोड लागू करने का निर्णय लिया है। गुरुवार, 1 फरवरी 2025 से यह नया नियम प्रभावी हो गया है। अब स्कर्ट, कटे-फटे कपड़े और रिवीलिंग ड्रेस पहनकर श्रद्धालु मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकेंगे।

🔹 ड्रेस कोड लागू करने का कारण

सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष आचार्य पवन त्रिपाठी ने बताया कि यह निर्णय श्रद्धालुओं के सुझावों और मंदिर की पवित्रता बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है।

➡️ मंदिर एक आस्था और धार्मिक स्थान है, जहां श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं पूरी करने आते हैं।
➡️ मंदिर में कुछ श्रद्धालुओं के अनुचित पहनावे को लेकर भक्तों ने आपत्ति जताई थी।
➡️ पवित्र स्थलों की मर्यादा बनाए रखने के लिए शालीन कपड़े पहनने का निर्देश दिया गया है।

आचार्य त्रिपाठी ने कहा, “यह कोई राजनीतिक या विवाद का विषय नहीं है, बल्कि धार्मिक आस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण निर्णय है।”

🔹 कौन-कौन से कपड़े प्रतिबंधित?

कटे-फटे कपड़े (Ripped Jeans, Torn Clothes)
रिवीलिंग ड्रेस (Short Skirts, Deep Neck, Transparent Clothes)
बहुत छोटे कपड़े या अनुचित परिधान

➡️ मंदिर में प्रवेश के लिए पारंपरिक और शालीन परिधान को प्राथमिकता दी जाएगी।

🔹 भक्तों को कैसे मिलेगी जानकारी?

सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि श्रद्धालुओं को धीरे-धीरे इस नए नियम के बारे में जानकारी दी जाएगी और मंदिर में प्रवेश के दौरान जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।

📢 ट्रस्ट का संदेश:
➡️ मंदिर एक आध्यात्मिक स्थान है, जहां आने वाले भक्त स्नान कर, अच्छे और शालीन कपड़े पहनकर प्रवेश करें।
➡️ नियमों का पालन करने से मंदिर की पवित्रता बनी रहेगी और भक्तों को सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होगी।

🔹 सिद्धिविनायक मंदिर – आस्था का प्रमुख केंद्र

सिद्धिविनायक मंदिर मुंबई का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है, जहां देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु भगवान गणेश के दर्शन करने आते हैं।

➡️ भारत के सबसे प्रसिद्ध गणेश मंदिरों में से एक
➡️ फिल्मी सितारों और राजनेताओं का भी पसंदीदा धार्मिक स्थल
➡️ हिंदू संस्कृति और परंपराओं का जीवंत उदाहरण

🔹 कुछ भक्तों ने इस फैसले का स्वागत किया, क्योंकि यह मंदिर की मर्यादा बनाए रखने में मदद करेगा।
🔹 कुछ लोगों ने इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर रोक बताया, लेकिन अधिकतर श्रद्धालु इसे उचित मान रहे हैं।

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