पूर्व प्रधान न्यायाधीश यूयू ललित की प्रथा को बंद किया, जनहित याचिकाएं आवंटित करने का तरीका बदलने पर डीवाई चंद्रचूड़ का फैसला
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व प्रधान न्यायाधीश यूयू ललित के कार्यकाल के दौरान एक खास प्रथा थी, जिसके तहत उन्होंने जनहित याचिकाओं को विभिन्न पीठों में आवंटित किया था। इस प्रथा को अब सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने बंद कर दिया है। उनका मानना है कि यह बदलाव सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही में सुधार लाएगा और न्याय वितरण को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाएगा।
यूयू ललित का तरीका
पूर्व प्रधान न्यायाधीश यूयू ललित के कार्यकाल के दौरान, सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिकाओं (PILs) को लेकर एक अनौपचारिक तरीका अपनाया गया था। वह ये याचिकाएं अपनी पसंद के अनुसार विभिन्न पीठों में आवंटित करते थे। इस प्रथा में यह बदलाव तब आया जब न्यायमूर्ति ललित ने अधिकतर जनहित याचिकाओं को प्रधान न्यायाधीश के कार्यालय से सीधे विभिन्न न्यायमूर्ति की पीठों में आवंटित किया। उनका यह कदम अधिक कार्यक्षमता और संतुलित न्याय देने के उद्देश्य से था, ताकि हर पीठ को कुछ विशेष मामलों में निर्णय लेने का अवसर मिले।
डीवाई चंद्रचूड़ का नया फैसला
हालांकि, वर्तमान प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने इस प्रथा को समाप्त करते हुए जनहित याचिकाओं के आवंटन को एक अधिक केंद्रीकृत और पारदर्शी प्रक्रिया बनाने का फैसला लिया। उन्होंने अब जनहित याचिकाओं के आवंटन का तरीका पूरी तरह से बदल दिया है, और इसके लिए अब न्यायिक प्रबंधन समिति की भूमिका को प्रमुख बना दिया है।
इस बदलाव के तहत, जनहित याचिकाओं को एक विशेष टीम द्वारा देखा जाएगा, जो यह तय करेगी कि इन मामलों को किस पीठ में भेजा जाएगा। इसका उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया को अधिक संगठित और सुव्यवस्थित बनाना है, ताकि मामलों का सही तरीके से निपटान हो सके और न्याय की गुणवत्ता बनी रहे।
न्यायिक सुधार की दिशा में कदम
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ का यह कदम सुप्रीम कोर्ट के कार्यों को न्यायिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उनका मानना है कि यह बदलाव न केवल न्याय की प्रक्रिया को सरल बनाएगा, बल्कि इससे न्यायाधीशों के कार्यभार में भी संतुलन रहेगा और न्यायालय की कार्यक्षमता में वृद्धि होगी।
इसके अलावा, इस निर्णय से कोर्ट के भीतर पारदर्शिता बढ़ने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि अब जनहित याचिकाओं के बारे में हर व्यक्ति को यह जानकारी मिलेगी कि उनका मामला किस पीठ में विचाराधीन है और उसे किन आधारों पर वहां भेजा गया है।
