वक्फ जेपीसी में विपक्षी मेंबर्स ने किया 5 राज्यों की यात्रा का बॉयकॉट, अब क्या कह रहे कमेटी चीफ जगदंबिका पाल
वक्फ संपत्तियों की जांच करने के लिए बनाई गई संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की पांच राज्यों की यात्रा को लेकर विपक्षी पार्टियों के सदस्यों ने बॉयकॉट कर दिया है। इस यात्रा का उद्देश्य वक्फ बोर्ड की संपत्तियों से जुड़े मामलों की गहन जांच करना था, लेकिन विपक्षी दलों ने इसे “राजनीतिक एजेंडे” के रूप में आरोपित करते हुए इस यात्रा का बहिष्कार किया। अब इस पूरे विवाद पर जेपीसी के अध्यक्ष जगदंबिका पाल का बयान सामने आया है।
विपक्ष का विरोध और यात्रा का बॉयकॉट
जेपीसी के सदस्य, जो कि कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), और अन्य विपक्षी पार्टियों से थे, ने पांच राज्यों की यात्रा को लेकर कई सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह यात्रा केवल वक्फ बोर्ड के मामलों की सच्चाई जानने के लिए नहीं, बल्कि इसे राजनीतिक उद्देश्य से किया जा रहा है। उनका आरोप है कि यह यात्रा भाजपा द्वारा नियंत्रित राज्यों में ही की जा रही है, जिससे जांच का निष्कर्ष पक्षपाती हो सकता है। विपक्षी सदस्यों का कहना है कि इस यात्रा से पहले वक्फ मामलों की सही और निष्पक्ष जांच के लिए एक व्यापक और समग्र दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए था।
जेपीसी अध्यक्ष का बयान
वहीं, इस मामले पर जेपीसी के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने कहा कि विपक्षी पार्टियों का विरोध “निराधार” और “अविवेकपूर्ण” है। उन्होंने बताया कि वक्फ संपत्तियों पर जांच करना देश की जनता के हित में है और यह कोई राजनीतिक कदम नहीं है। पाल ने कहा, “विपक्ष को इस मुद्दे पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। हम केवल यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं कि वक्फ संपत्तियों का दुरुपयोग नहीं हो और उनका सही तरीके से उपयोग हो।”
उन्होंने यह भी कहा कि जेपीसी की यात्रा का उद्देश्य उन राज्यों में वक्फ संपत्तियों की स्थिति का जायजा लेना है, जहां इन संपत्तियों का सही तरीके से उपयोग नहीं हो रहा था। पाल के अनुसार, यह यात्रा पूरी तरह से निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जाएगी, और किसी भी प्रकार का राजनीतिक दबाव इसमें शामिल नहीं होगा।
विपक्ष का आरोप
विपक्षी दलों का आरोप है कि यह यात्रा उन राज्यों में ही हो रही है जहां भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) की सरकारें हैं। इसके अलावा, विपक्षी नेताओं का कहना है कि इस प्रकार की यात्रा से यह संदेश जाता है कि सरकार पहले से तय किए गए निष्कर्षों को ही लागू करना चाहती है, जो कि पूरी प्रक्रिया को निष्पक्ष नहीं बनाता। विपक्ष ने यह भी दावा किया कि इस यात्रा को लेकर विपक्षी नेताओं से कोई चर्चा नहीं की गई थी और बिना उचित सहमति के यात्रा पर जाना “राजनीतिक” कदम है।
