बांग्लादेश में बढ़ता राजनीतिक संकट: शेख हसीना ने अंतरिम सरकार पर लगाया अराजकता फैलाने का आरोप
“ बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना ने नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि यह सरकार बांग्लादेश को आतंकवाद और अराजकता के केंद्र में बदल रही है। हसीना ने अपने समर्थकों को आश्वासन दिया कि वह जल्द ही देश लौटेंगी और पीड़ित परिवारों को इंसाफ दिलाएंगी।“
मोहम्मद यूनुस को देश चलाने का कोई अनुभव नहीं: हसीना
शेख हसीना ने मोहम्मद यूनुस को अयोग्य नेता करार देते हुए कहा कि “जब उन्हें देश चलाने का कोई अनुभव नहीं, तो उन्हें इससे बचना चाहिए।”
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले वर्ष हुए छात्रों के हिंसक आंदोलन में दर्जनों पुलिस अधिकारियों की हत्या हुई, लेकिन यूनुस और उनकी सरकार चुप रही और अराजकता को पनपने दिया।
हसीना ने कहा, “यूनुस ने सभी जांच समितियों को भंग कर दिया और आतंकवादियों को खुली छूट दे दी। वे बांग्लादेश को खत्म कर रहे हैं। लेकिन हम इस आतंकवादी सरकार को उखाड़ फेंकेंगे। इंशाअल्लाह।”
हसीना के समर्थकों से संपर्क रोकने के लिए हिंसा का सहारा
शेख हसीना ने दावा किया कि अंतरिम सरकार उनके और उनके समर्थकों के बीच संपर्क को रोकने के लिए हिंसक तरीकों का इस्तेमाल कर रही है।
उन्होंने कहा कि वे आवामी लीग के कार्यकर्ताओं से संवाद बनाए हुए हैं, जिससे सरकार चिंतित है।
हाल ही में राजधानी ढाका के धानमंडी-32 स्थित शेख मुजीबुर रहमान के घर पर तोड़फोड़ और आगजनी की गई। इसके अलावा बुलडोजर चलाकर ऐतिहासिक मकान को नुकसान पहुंचाने की भी खबरें हैं।
बांग्लादेश में बढ़ते राजनीतिक तनाव की स्थिति
बांग्लादेश इस समय गहरे राजनीतिक संकट से गुजर रहा है।
शेख हसीना और मोहम्मद यूनुस के बीच सत्ता संघर्ष गहराता जा रहा है।
अंतरिम सरकार के फैसलों और हिंसक घटनाओं से देश में अस्थिरता का माहौल बना हुआ है।
क्या होगा आगे?
विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता आगे और बढ़ सकती है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस संकट पर नजर बनाए हुए है और मध्यस्थता की संभावना भी जताई जा रही है।
अगर हसीना जल्द ही देश लौटती हैं, तो यह राजनीतिक लड़ाई और तेज हो सकती है।
बांग्लादेश में राजनीतिक संघर्ष और अस्थिरता चरम पर है। शेख हसीना ने अंतरिम सरकार को आतंकवाद समर्थक करार दिया है और जल्द ही देश लौटकर इसका विरोध करने की कसम खाई है। अब देखना यह होगा कि क्या यह संकट और गहराएगा या कोई समाधान निकलेगा।
