भारत में कोयला उत्पादन की नई ऊंचाइयां: कैप्टिव और कमर्शियल खदानों का बढ़ता योगदान”
“भारत का कोयला उत्पादन हर साल नई ऊंचाइयों को छू रहा है। कोयला मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में अप्रैल से फरवरी तक की अवधि में कैप्टिव और कमर्शियल खदानों से कोयला उत्पादन 32.5 प्रतिशत बढ़कर 167.36 मिलियन टन (एमटी) हो गया है, जो कि पिछले साल समान अवधि में 126.28 एमटी था। इस वृद्धि के पीछे सरकार की नई नीतियां और निजी निवेश की भूमिका अहम रही है।“
कोयला डिस्पैच में उछाल
कोयला उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ कोयला डिस्पैच में भी तेजी आई है। इस वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 170.66 एमटी तक पहुंच गया, जो कि पिछले साल समान अवधि में 128.45 एमटी था। यह 32.86 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है, जिससे बिजली, स्टील और सीमेंट उद्योगों को स्थिर और निर्बाध कोयला आपूर्ति सुनिश्चित हो रही है।
कैप्टिव और कमर्शियल खदानों का योगदान
कैप्टिव और कमर्शियल खदानों की शुरुआत से कोयला उद्योग में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है। सरकार ने इन खदानों को खोलने के लिए कई नीतिगत बदलाव किए, जिससे घरेलू उत्पादन में सुधार हुआ है और आयात पर निर्भरता कम हुई है।
भास्करपारा कोयला खदान की शुरुआत
प्रकाश इंडस्ट्रीज लिमिटेड द्वारा संचालित भास्करपारा कोयला खदान 15 फरवरी, 2025 से शुरू हो गई है। इसकी अधिकतम क्षमता 15 एमटी है। इस खदान के चालू होने से उत्पादन क्षमता में और वृद्धि होगी।
कमर्शियल कोयला नीलामी का 12वां दौर शुरू
कोयला मंत्रालय ने कमर्शियल कोयला खदानों की नीलामी के 12वें दौर के लिए रोड शो शुरू कर दिया है। यह आयोजन मार्च के दूसरे सप्ताह में होने की उम्मीद है, जिसमें विभिन्न पक्षकारों को शामिल किया जाएगा। इस नीलामी का उद्देश्य घरेलू कोयला उत्पादन को बढ़ावा देना और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है।
11वें दौर की नीलामी में मिली शानदार प्रतिक्रिया
नवंबर 2024 में हुए 11वें दौर की नीलामी में कुल 27 ब्लॉकों में से 20 कोयला खदानों के लिए 70 से अधिक बोलियां प्राप्त हुईं। यह दर्शाता है कि निवेशक अब इस क्षेत्र में अधिक रुचि दिखा रहे हैं।
सरकारी नीतियों और सुधारों का असर
सरकार द्वारा कोयला उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। इनमें कोयला खदानों की पारदर्शी नीलामी, आधुनिक तकनीकों का समावेश और निजी कंपनियों को अधिक स्वतंत्रता देना शामिल है। इन सुधारों से उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
ऊर्जा क्षेत्र को कैसे मिलेगा लाभ?
बढ़ते कोयला उत्पादन का सबसे बड़ा फायदा ऊर्जा क्षेत्र को मिलेगा। बिजली उत्पादन के लिए कोयले की मांग लगातार बनी रहती है और घरेलू आपूर्ति बढ़ने से आयात पर निर्भरता कम होगी। इससे देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता भी बढ़ेगी।
भारत में कोयला उत्पादन और डिस्पैच में लगातार वृद्धि हो रही है। कैप्टिव और कमर्शियल खदानों के विस्तार से इस क्षेत्र को और मजबूती मिल रही है। सरकारी सुधारों और निवेशकों की बढ़ती रुचि के कारण आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र और अधिक विस्तार करेगा, जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
