गणतंत्र दिवस 2025: राष्ट्रपति भवन का खास आमंत्रण, शिल्प कला और परंपरा का संगम
“गणतंत्र दिवस 2025 के अवसर पर राष्ट्रपति भवन ने देश-विदेश की बड़ी हस्तियों को खास तरीके से आमंत्रित किया है। इस बार आमंत्रण पत्र को दक्षिण भारत की प्रचलित पारंपरिक शिल्प कला और पर्यावरण अनुकूल सामग्रियों से सजाया गया है।”
आमंत्रण पत्र की खासियत
राष्ट्रपति भवन का आमंत्रण पत्र बांस से बनी विशेष पेटिका में भेजा गया है। यह पारंपरिक शिल्प कला का उत्कृष्ट नमूना है, जिसमें स्थिरता और पुनः उपयोग की संभावना है। इस बॉक्स में पोचमपल्ली इकत फैब्रिक, इटिकोप्पका टॉय, गंजिफा कला, स्क्रू-पाइन बुनाई, कांचीपुरम सिल्क, और कलमकारी चित्रकला का खूबसूरत प्रदर्शन किया गया है।
शिल्प कलाओं की झलक
पोचमपल्ली इकत वस्त्र
पोचमपल्ली जिला अपनी अनूठी इकत बुनाई के लिए प्रसिद्ध है। इस आमंत्रण में प्रयुक्त कपड़े को ‘पेंसिल पाउच’ के रूप में पुनः उपयोग किया जा सकता है।
इटिकोप्पका टॉय
आंध्र प्रदेश के इटिकोप्पका गाँव के काष्ठ और लाख से बने रंग-बिरंगे खिलौनों को आमंत्रण में शामिल किया गया है। ये खिलौने पारंपरिक परिधान और जीवंत रंगों का प्रतीक हैं।
गंजिफा कला
कर्नाटक की गंजिफा कार्ड कला मैसूर की सांस्कृतिक धरोहर है। इसे एक आकर्षक फ्रिज मैग्नेट के रूप में आमंत्रण का हिस्सा बनाया गया है।
स्क्रू-पाइन बुनाई
केरल की महिला हस्तशिल्पियों द्वारा स्क्रू-पाइन की पत्तियों से बने चटाई और टोकरियाँ यहां ‘बुकमार्क’ के रूप में प्रस्तुत की गई हैं।
कांचीपुरम सिल्क
तमिलनाडु के कांचीपुरम सिल्क का उपयोग एक सुंदर हस्तनिर्मित पाउच में किया गया है, जो इसकी भव्यता और बुनाई कौशल को दर्शाता है।
कलमकारी चित्रकला वाला बांस का बॉक्स
यह बॉक्स बांस से बना है और आंध्र प्रदेश की प्रसिद्ध कलमकारी चित्रकला से सजा हुआ है। इसे राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत तैयार किया गया है।
पारंपरिक कला और स्थिरता का संदेश
यह अनोखा आमंत्रण न केवल भारत की शिल्प कला की विविधता को दर्शाता है, बल्कि पर्यावरण के प्रति जागरूकता का भी संदेश देता है। राष्ट्रपति भवन का यह प्रयास पारंपरिक और आधुनिकता का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।
